क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा
संसद
की कार्यवाही २०वें दिन भी न हो सकी। भारतीय संसद जिसे देश का मन्दिर कहा जाता है,
जहां से देश को सही तरह से चलाने के लिये कानून बनते हैं, निर्देश दिये जाते हैं,
वह संसद २० दिन से क्षेत्रीय पार्टियों के हंगामे के कारण बाधित है। आश्चर्य होता
है। इनमे काबिल सासद चर्चा करने के बजाय शोर शराबे मे देश का इतना नुकसान कर रहे
हैं। विकास की गति को विराम लगा रहे हैं। मैं आम नागरिक सोचता हूं कि क्या
क्षेत्रीय पार्टियां राष्ट्रिय पार्टियों पर हावी होती जा रही है? आज हमें तय करना
होगा कि देश की संसद में क्षेत्रीय पार्टियों को कोई जगह न देकर केवल राष्ट्रिय
पार्टियों को ही आना चाहिये। क्षेत्रीय पार्टियां विधान सभाओं तक ही सीमित होना
चाहिये। छोटे- छोटे घडों की वजह से देश को पंगु नही बना सकते। देश का विकास नही
रोक सकते। इसके अलावा किसी विवाद का हल चर्चाओं से हल हो सकता है। बेल में जाकर
संसद कार्यवाही में रूकावट डालने से नही। मैं तो कहता हूं संसद मे इस बेल को
समाप्त कर देना चाहिए। सांसदों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढाना अति आवश्यक है।
अविनाश अग्रवाल
काशीपुर